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Speech for the use of HS at the Valedictory Ceremony of the National Women's Parliament organised by the Andhra Pradesh Legislative Assembly at Amravati on 12 February 2017


Speech for the use of HS at the Valedictory Ceremony of the National Women's Parliament organised by the Andhra Pradesh Legislative Assembly at Amravati on 12 February 2017

Hon'ble Chief Minister of Andhra Pradesh, Shri Chandrababu Naidu; Hon'ble Speaker, Andhra Pradesh Legislative Assembly, Dr. Kodela Siva Prasada Rao; Hon'ble Union Minister of Urban Development and Information and Broadcasting, Shri Venkaiah Naidu; Hon'ble Minister for Housing and Rural Development, Andhra Pradesh, Dr. Kamidhi Mrinalini, Hon'ble Members of Parliament; Hon'ble Members of the Andhra Pradesh Legislative Assembly; Eminent social and corporate women leaders; Students; Ladies and Gentlemen: 1. It gives me immense pleasure to be with you all today at this Valedictory Ceremony of the National Women's Parliament. At the outset, I would like to thank Hon'ble Chief Minister Shri Chanrda Babu Naidu ji and Dr. Kodela Siva Prasada Rao, Hon'ble Speaker of Andhra Pradesh Legislative Assembly, for inviting me to this august gathering. It is indeed a joy to be in this beautiful capital city of Amaravati, which is being called the People's Capital. The people and the Chief Minister of Andhra Pradesh deserve rich accolades for developing it as the most modern state-of-the-art city. I offer my sincere appreciation to the Andhra Pradesh Legislative Assembly for their laudable initiative in organizing this important event on the theme 'Empowering Women for Nation Building'. 2. Friends, in recent months, the Parliament of India has been making consistent efforts to mainstream the role of women legislators in policy formation and programme implementation, particularly in the development sphere. As you may recall, last year in August, our Parliament hosted the first meeting of BRICS Women Parliamentarians Forum in Jaipur. The Forum was initiated by us to bring women parliamentarians of BRICS countries under one roof to discuss ways and means of realising the targets of Sustainable Development Goals. Prior to this Meeting, as a first step in this direction, we had also organised a two day National Women Legislators Conference in March 2016 on the theme 'Women Legislators: Building a Resurgent India'. The Conference, as you know, was attended by over 350 Delegates comprising State Legislators, Members of Parliament, Chief Ministers and Union Ministers and Chief Ministers of various States. The Conference dwelt on many important issues and challenges concerning women with a special thrust on how women legislators could proactively and productively contribute towards nation building. 3. Today, I am immensely pleased that a similar initiative has been taken by the Andhra Pradesh Legislative Assembly to bring together women legislators and parliamentarians, as also eminent women leaders from the civil society and the corporate world to continue this important discussion on the role of women in national building. In fact, I consider the present convention as a continuation of our endeavour to empower women and to help them in contributing towards nation building. With this objective in mind, I am happy to learn that during the last two days you have deliberated on a number of important themes and contemporary challenges concerning women including on women's status and decision making power, vision for the future and women as change makers in global scenario, among others. 4- आज इस महिला सम्मेलन में आप सबको देखकर मन आशा और उम्मीद से भर गया है। यहां एकत्रित नारी शक्ति का मैं अभिनन्दन करती हूं। आप सभी उस ईश्वरीय तत्व की प्रखर लौ हैं जिनकी रौशनी से हमारा समाज और देश सदियों से आलोकित होता आया है और यह क्रम निरंतर जारी रहेगा। नारी स्वयं जीवन दायिनी है। नारी प्रेम, संरक्षण एवं समर्पण है, वह स्वभाव से ही कल्याणी है। श्रीमद्भागवत गीता में इस शाश्वत सत्य को बहुत ही सरलता से दर्शाया गया हैः- कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा। (यानी, नारियों में मैं कीर्ति हूं, श्री हूं, वाक् हूं, स्मृति हूं, मेधा हूं, धृति हूं और क्षमा हूं) 5. आंध्र की धरती ओजस्वी व तेजस्वी नारी शक्ति का केन्द्र रही है। पालगुडु वरलक्षम्मा, अन्नपूर्णा देवी एवं सरोजनी नायडू जैसी स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर वर्तमान में पी.वी. सिन्धू, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल और कोनेरू हम्पी इस धरती की प्रतिभाशाली बालाओं ने देश का नाम विभिन्न क्षेत्रों में रौशन किया है। मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि इस पावन धरती की सकारात्मक ऊर्जा आप सबको प्रेरित करेगी। 6. वर्तमान में महिलाएं परम्परागत पेशों जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, एवं कॉल सेंटर एक्जीक्यूटिव, बैंकिंग एवं सरकारी क्षेत्रों के अलावा गैर-परंपरागत क्षेत्रों जैसे defence and paramilitary sector, commercial driving, petrol pump worker, security guards, fighter pilot के रूप में अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। आपको अपने-अपने क्षेत्रों में यह संवाद पहुंचाना होगा कि उनके लिए रोजगार के कई और नए-नए क्षेत्र खुले हैं। आप सशक्त हैं, आवश्यकता है औरों को अपने जैसा बनाने की। 7. Today, technology has made the world a global village. In this fast moving and rapidly developing world, where interdependence amongst nations and societies has become more relevant, women with her inherent qualities of love, compassion, devotion, understanding, tolerance and patience have a very crucial and proactive role to play at every level. Women have to be in the driving seat to navigate the ship of life for family, society and nation. 8. मेरा निजी अनुभव है कि महिलाएं जब-जब किसी विधायिका या कार्यपालिका के पद पर होती हैं तो वहां विकास की गति एवं दिशा दोनों ही बेहतर और सकारात्मक होती है। एक सर्वे के मुताबिक जिन-जिन पंचायतों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, स्वच्छता और पेयजल से संबंधित अलग-अलग योजनाओं पर अधिक खर्च किया गया है और उन सुविधाओं का स्तर बेहतर हुआ है। पार्लियामेंट में मेरा अनुभव है कि महिला प्रतिनिधियों में विषयों को गूढ़ता से जानने की प्रवृत्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ी है। मैंने विभिन्न गूढ़ विषयों की जानकारी एवं जटिल पहलुओं की जानकारी संसद सदस्यों तक पहुंचाने के लिए संसद में Speakers Research Initiative प्रारंभ किया है और बड़ी संख्या में महिला सदस्य इसका लाभ ले रही हैं, इसकी मुझे खुशी है। I believe that If more and more women participate in policy making and legislature, executive and judiciary, the direction and quality of governance will improve a lot. अतः, मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़ी जानकारियों को हासिल करें एवं इसके सभी पक्षों को आत्मसात करें। तभी आप खुद सशक्त होंगी एवं सभी को सशक्त एवं जागरूक बनाएंगी। 9. कानून केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है बल्कि इसे श्रद्धापूर्वक अंतःकरण से पालन किया जाना चाहिए। चूंकि नारी में संवेदनशीलता होती है, उनमें पारिवारिक, सामाजिक एवं वास्तविक समस्याओं की समझ होती है और उनके समाधान के बारे में सूझ-बूझ और दृष्टि होती है। उनमें सेवा का स्वभाव भी होता है। स्त्री सदा से ही समाज में सबके हितों की बात करती है, सबका ख्याल रखती है। अतः, नीति एवं विधि निर्माण में स्त्री की ज्यादा भागीदारी समाज और राष्ट्र के लिए अत्यन्त सकारात्मक एवं शुभ है। 10. पर्यावरण संरक्षण के लिए भी स्त्री अधिक संवेदनशील एवं प्रगतिशील होती है क्योंकि वे धार्मिक प्रतीक, क्रिया के रूप में तुलसी, वट वृ़क्ष, पीपल आदि का न केवल संरक्षण करती है बल्कि पूजा करती हैं। घर में ऊर्जा संरक्षण के प्रति भी उनकी प्रतिबद्धता एवं झुकाव ज्यादा होता है। साथ ही, स्त्री घर में बचत और वित्त के मामले में बहुत ही सूझ-बूझ एवं व्यावहारिक निर्णय लेती है। वे कुशल प्रबंधक, शिक्षक, मितव्ययी, साहसी, सामाजिक संबंधों को संजोकर रखने वाली होती है। इसलिए मेरा पूरा विश्वास है कि यदि महिलाओं को उचित अवसर मिले तो वे गृह एवं वित्त एवं रक्षा मंत्री के रूप में भी अपनी कार्यकुशलता सिद्ध कर सकती है। 11. National Conference of Womens Legislators dh theme song उम्मीदम था जिसमें बताया गया था कि महिलाएं मां, कुशल प्रबंधक, साहसी एवं संवेदनशील स्त्री की भूमिकाओं में सफलतापूर्वक परिवार, समाज और देश को सारथी की तरह दिशा देती है। इस गीत में स्त्री शक्ति की कल्पना कल-कल बहती नदी से की गई है। यह सही भी है कि नदी जीवनदायिनी है, स्त्री भी जीवनदायिनी है। नदी की तरह स्त्री भी अपनी राह खुद बनाते चलती है। नदी के किनारे जीवन बसता है। परंपरागत नदी बस्तियां, नदी के किनारे गांव-स्त्री के आंचल में जीवन पलता है- नदी के सहारे फलता-फूलता है, मगर धीरे-धीरे हमने नदी के प्रवाह को रोका-तोड़ा प्रदूषित किया- यही बात स्त्री जीवन की है। आज पानी का महत्व समझकर, हम फिर गंगा को निर्मल करने की, नदियों को जोड़ने की, साफ करने की बात करते हैं। वही बात स्त्री या नारी, इसलिए नहीं कि वे देश की आधी आबादी हैं, अपितु जीवनदात्री-निर्मात्री मातृशक्ति हैं, पर भी लागू होती है। मगर स्त्री को भी अपनी शक्ति का एहसास एवं अनुभव करना होगा। 12. Distinguished Delegates and Friends! I would like to urge you to contribute in whatever different ways you could towards mitigating the problems faced by women in helping to empower them to contribute to the country's development. It is my hope that new perspectives and insights you gained during this convention through the exchange of views and experiences will help you to bring about positive outcomes for women in the society. We have to now move from development and empowerment of women to women led development and empowerment. 13. With these words, I once again thank you all for inviting me here and I wish you all the very best in the discharge of your onerous public roles and responsibilities in the future. Thank you.

 

 

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